अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय द्वारा रात्रिकालीन अदालतों का संचालन करने और शनिवार का अवकाश निरस्त करने की व्यवस्था का विरोध किया है.

Jan 9, 2026 - 16:27
 13
अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय द्वारा रात्रिकालीन अदालतों का संचालन करने और शनिवार का अवकाश निरस्त करने की व्यवस्था का विरोध किया है.

रिपोर्टर शुभ दाधीच 

बूंदी: जिले में न्यायिक व्यवस्थाओं में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में शुक्रवार को बूंदी के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य स्थगित रखकर कामकाज बंद रखा. अभिभाषक परिषद बूंदी के आह्वान पर सभी अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया, जिससे अदालतों का कामकाज पूरी तरह ठप रहा. अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में नारेबाजी के साथ अपनी मांगों को रैली के जरिए मुखर किया. इसके बाद बूंदी बार अध्यक्ष नारायण सिंह गौड़, उपाध्यक्ष अनीस अहमद तथा सचिव पंकज दाधीच के नेतृत्व में जिला एवं सेशन न्यायाधीश को न्यायाधिपति, उच्च न्यायालय जयपुर, के नाम ज्ञापन सौंपा गया. रैली और ज्ञापन के माध्यम से वकीलों ने बताया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है.

रात्रिकालीन अदालतें व्यावहारिक नहीं: बार अध्यक्ष नारायण सिंह गौड़ ने कहा कि उच्च न्यायालय जयपुर द्वारा प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के तहत रात्रिकालीन अदालतों का संचालन अधिवक्ताओं के लिए व्यावहारिक नहीं है. इससे न केवल अधिवक्ताओं बल्कि पक्षकारों को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि न्यायालयों का संचालन दिन के समय में ही होना चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया सुचारु और प्रभावी बनी रहे. उन्होंने इंदरगढ़ और लाखेरी के न्यायिक कार्यों का क्षेत्राधिकार बूंदी में रखने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया. यह निर्णय जनहित के विपरीत है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए. साथ ही दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टियों को निरस्त कर कार्य दिवस घोषित किए जाने के प्रस्ताव का भी अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध किया. गौड़ ने कहा कि पहले से ही न्यायिक कार्यों का दबाव अत्यधिक है, ऐसे में अवकाश समाप्त करने से अधिवक्ताओं और कर्मचारियों पर अतिरिक्त मानसिक व शारीरिक दबाव पड़ेगा. यह निर्णय न तो अधिवक्ताओं के हित में है और न ही न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित.

स्टाम्प वेंडर और टाइपिस्ट ने भी बंद रखा कामकाज: अभिभाषक परिषद के सचिव पंकज दाधीच ने बताया कि आंदोलन के तहत शुक्रवार को पूरे दिन न्यायिक कार्य स्थगित रहा. इस हड़ताल में केवल अधिवक्ता ही नहीं, बल्कि स्टाम्प वेंडर और टाइपिस्ट भी शामिल रहे. उन्होंने अपने-अपने कार्य बंद रखकर अभिभाषक परिषद् बूंदी की मांगों का समर्थन किया. इस मामले को लेकर वकीलों ने संघर्ष समिति का गठन कर वरिष्ठ अधिवक्ता नवेद केसर लखपति को इसका अध्यक्ष भी बनाया है. संघर्ष समिति अध्यक्ष नवेद केसर लखपति ने बताया कि रैली से पूर्व अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में एकत्र होकर रणनीति बनाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. नारेबाजी के दौरान न्यायिक व्यवस्था में जनहित और व्यावहारिक निर्णय लेने की मांग बार-बार दोहराई गई. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

कई मामलों की सुनवाई टली: प्रवक्ता ओरंक नय्यर ने बताया कि वकीलों की हड़ताल के चलते अदालतों में पेश होने आए पक्षकारों को निराश लौटना पड़ा. कई मामलों की सुनवाई टल गई. अधिवक्ताओं का कहना है कि वे जनता की परेशानी समझते हैं, लेकिन यह आंदोलन न्याय व्यवस्था को बचाने और उसे जनोन्मुखी बनाए रखने के लिए आवश्यक है. इस दौरान पूर्व बार अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा, आनंद सिंह नरूका, वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश पारीक, भूपेंद्र सक्सेना, हैदर अली सहित सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद थे.