बूंदी में पथराव-तोड़फोड़ के 22 आरोपी दोषी करारः सभी को तीन साल का कठोर कारावास, 9 साल बाद आया फैसला
बूंदी के टाइगर हिल स्थित मान्धाता प्रकरण में कोर्ट ने नौ साल बाद फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मनोज तिवारी ने 22 आरोपियों को दोषी मानते हुए तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है।
दोषी ठहराए गए 22 आरोपियों में महावीर कॉलोनी निवासी साकिब, युसूफ, जावेद, मोहम्मद रईस, सलमान, इमरान, मोहम्मद कासिम, अब्दुल हमीद, सद्दाम, मतीन, शोएब, मोहम्मद सोहेल, समीर, गुरुनानक कॉलोनी निवासी शहजाद, सद्दीक, बालचंद पाड़ा निवासी खालिक हुसैन, नैनवां रोड नाले के पास निवासी मोहम्मद हावेस, न्यू नेहरू स्कूल के पास निवासी सद्दाम, अलोद निवासी शौकत, झालावाड़ के गागरोन रोड निवासी शानू, उंदालिया की डूंगरी निवासी फिरोज और मोरडी पाड़ा निवासी मोहम्मद अफजल उर्फ कालू उर्फ लुक्का शामिल हैं। एक आरोपी रहमान की मृत्यु होने के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई 24 फरवरी 2026 को समाप्त कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह विवाद 29 अप्रैल 2017 को टाइगर हिल स्थित मान्धाता की छतरी पर उकेरी गई हनुमान प्रतिमा को हटाने को लेकर शुरू हुआ था। उस दिन सुबह करीब 9:30 बजे मीरा साहब की पहाड़ी और मीरा का बाग से मान्धाता जाने वाले मार्ग पर एक समुदाय द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन देने की तैयारी थी। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि निजाम उर्फ निजामुद्दीन मद्रासी के नेतृत्व में लगभग 700-800 लोगों की भीड़ मान्धाता की ओर बढ़ रही है। पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ उग्र हो गई और पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कोतवाली थाने की जीप समेत अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
पुलिस कैमरा मैन देवेंद्र मिश्रा से घटना की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी जबरन डिलीट करवाई गई। भीड़ में शामिल कई लोग मीरा गेट की ओर बढ़ा, जहां दुकानों में तोड फोड और लूटपाट की घटनाएं हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर बितर किया। मामले में विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था।